शेखचिल्ली के खुरपे को बुखार

शेखचिल्ली रोज जंगल में घास खोदने जाया करता था। एक दिन जब वह घास खोदकर घर लौटा तो अचानक उसे ध्यान आया कि उसका खुरपा तो जंगल में ही रह गया है। वह खुरपा लेने तुरंत जंगल की ओर चल दिया। तेज धूप के कारण खुरपा बहुत गरम हो गया था। जैसे ही शेखचिल्ली ने खुरपे को हाथ लगाया वह बुरी तरह तप रहा था। उसने सोचा खुरपे को बुखार हो गया है।

वह उसे लेकर हकीम के पास गया और बोला- हकीम साहब मेरे खुरपे को बुखार हो गया है। जरा दवाई दे दीजिए।

हकीम ने सोचा शेखचिल्ली उससे शरारत कर रहा है। हकीम ने खुरपे को हाथ लगाकर कहा- “हां, तुम्हारे खुरपे को बुखार हो गया है। उसे रस्सी से बांधकर कुंएं में लटका दो, सारा बुखार उतर जाएगा। शेखचिल्ली ने वैसे ही किया जैसा हकीम ने कहा था। पानी में जाने के कारण खुरपा ठंडा हो गया और शेखचिल्ली ने समझा कि हकीम की सलाह काम कर गई।

एक दिन शेखचिल्ली के पड़ोस में रहने वाली महिला को तेज बुखार हो गया।

जब उसके घरवाले उसे हकीम के पास ले जाने लगे तो शेखचिल्ली ने कहा- तुम इन्हें हकीम के पास क्यों ले जा रहे हो? हकीम जो इलाज बताएंगे वो तो मैं यहीं बता दूंगा। इन्हें रस्सी से बांधकर किसी तालाब या कुंएं में डुबकी लगवाओ। बुखार उतर जाएगा। हकीम साहब ने मुझे यही तरकीब बताई थी। लोगों ने शेखचिल्ली की बात मानकर महिला को तालाब में गोते लगवाए।

थोड़ी देर बाद जब उन्होंने महिला को हाथ लगाकर देखा तो उसके प्राण पखेरु उड़ चुके थे।

महिला के घर वालो को गुस्सा आ गया और वे शेखचिल्ली पर चिल्लाने लगे। उनको चिल्लाता देख शेखचिल्ली ने कहा- मैंने सिर्फ बुखार उतरने की बात कही थी वो तो उतर गया ना।

देखो बुढिया ठंडी हो गई है।

अब मुझपर क्यों चिल्ला रहे हो। जो कहना है हकीम साहब को कहो ये उन्हीं का नुस्खा था। गुस्से में भुनभुनाते लोग हकीम साहब के पास जा पहुंचे और सारा किस्सा कह सुनाया। उनकी बात सुनकर हकीम ने अपना माथा पीटा और बोला- मैंने ये नुस्खा शेखचिल्ली के तपते हुए खुरपे को ठंडा करने के लिए बताया था। लेकिन वह महिला इंसान थी खुरपा नहीं। उसे इलाज के लिए मेरे पास लाना चाहिए था।

शेखचिल्ली की इस हरकत के लिए शेखचिल्ली को घरवालों की डांट और लोगों का गुस्सा झेलना पड़ा। उसने भविष्य में कभी इलाज न बताने की कसम खा ली।

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