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12 Jyotirling – List – Name | Place | Images

12 Jyotirling - List , Name Place Images
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12 Jyotirling:- आज हम आपको यहां पर अपने इस वेबसाईट के माध्यम से आपको भगवान शंकर जी के 12 Jyotirling के बारें विस्तार से बतायेगें । आपको यहां पर सभी 12 Jyotirling की पूरी जानकारी मिल जायेगी। जिससे कि आप 12 Jyotirling के बारे में जान पायेगें कि 12 Jyotirling की क्या काहानी हैं। तो आप 12 Jyotirling के बारें में जरूर पढ़े।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

सोमनाथ मंदिर जो की गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित है यहाँ की वास्तुकला चालुक्य शैली से मिलती है माना जाता है कि भगवान शिव इस तीर्थ स्थल पर प्रकाश के एक जलमग्न स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे। शिव पुराण के अनुसार सोमनाथ शिवलिंग की स्थापना चंद्रदेव द्वारा की गयी थी. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी के अनुसार चंद्रमा ने दक्ष प्रजापति की 27 बेटियों से शादी की थी, लेकिन चंद्रमा ने एक पत्नी रोहिणी को छोड़कर बाकी सभी पत्नियों को त्याग दिया, जिसके बाद प्रजापति द्वारा चंद्रमा को क्षय रोग होने का श्राप दिया गया। इस श्राप से छुटकारा पाने और अपनी खोई हुई चमक और सुंदरता को वापस पाने के लिए इसी जगह पर भगवान शिव की अराधना कर चंद्रमा ने श्राप से मुक्ति पाई थी। सोमनाथ देश के सबसे अधिक पूजे जाने वाले तीर्थस्थलों में से एक है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंदिर गोमती द्वारका और बैत द्वारका के बीच गुजरात में सौराष्ट्र के तट पर स्थित है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग सभी 12 ज्योतिर्लिंग में से काफी लोकप्रिय ज्योतिर्लिंग है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा के अनुसार नागेश्वर को इस धरती का सबसे शक्तिशाली 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना गया है, जो सभी प्रकार के जहरों के संरक्षण का प्रतीक है। भूमिगत गृभग्रह में स्थित नागेश्वर महादेव के पवित्र मंदिर में आशीर्वाद लेने हजारों भक्त हर साल यहां पहुंचते हैं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में 25 मीटर ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा , बड़े बगीचे और नीले सागर का अबाधित दृश्य पयर्टकों को मोहित कर देता है।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पांच ज्योतिर्लिंग में से एक है। 12 ज्योतिर्लिंग में से महाराष्ट्र ज्योतिर्लिंग लिस्ट में पुरे 5 मंदिर है। भीमाशंकर मंदिर महाराष्ट्र के पुणे जिले से 110 किमी दूर स्थित मेंको मोटेश्वर मंदिर नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर सुहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। यहां से भीमा नामक नदी बहती है जो दक्षिण पश्चिम दिशा में बहती हुई रायचूर जिले में कृष्णा नदी से मिलती है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग नासिक

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पांच ज्योतिर्लिंग में से दूसरा ज्योतिर्लिंग और भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से तीसरा ज्योतिर्लिंग हैं। त्रयंबकेश्वर मंदिर नासिक जिले से 25 किमी की दूरी पर ब्रह्मगिरी पर्वत के पास स्थित है। ये पर्वत गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है, जिसे गौतमी गंगा भी कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार गोदावरी नदी और गौतमी ऋषि ने भगवान शिव से यहां निवास करने की विनती की थी इसलिए यहां भगवान शिव त्रयंबकेश्वर के रूप में प्रकट हुए। इस ज्योतिर्लिंग का सबसे अनोखा हिस्सा इसका आकार है। एक तीर्थस्थल के बजाए यहां एक खंभा है, जिसमें तीन खंभे हैं। ये तीन खंभे सबसे शक्तिशाली और आधिकारक देवताओं ब्रह्मा , विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हैं।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

देश के सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले ज्योतिर्लिंग में से एक है वैद्यनाथ । वैजनाथ भी हिंदू धर्म के सती के 52 शक्तिपीठों मै से एक है। पौराणिक कथाओं और 12 ज्योतिर्लिंग कहानी के अनुसार यहां रावण ने वर्षों तक शिव की अराधना की थी और शिव को लंका में आमंत्रित कया था। शिव ने शिवलिंग के रूप में खुद को रावण को सौंपा और कहा कि लंका के पहुंचने तक ये शिवलिंग नीचे नहीं गिरना चाहिए, लेकिन रावण ने भगवान शिव की अवज्ञा की और लंका पहुंचने से पहले ही शिवलिंग उनके हाथों से नीचे गिर गया। जहां ये शिवलिंग गिरा वहीं भगवान शिव देवघर में वैद्यनाथ के रूप में निवास करने लगे। सावन के महीने में यहां ज्यादा पदयात्रा होती हैं, लोगों का मानना है कि यहां भगवान शिव की आराधना करने से सभी दुखों से मुक्ति मिलती है।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखण्ड

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

शिवपुराण के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग हैं। जिसमें से पांचवां ज्योतिर्लिग केदारनाथ है। जिसे केदारेश्वर भी कहा जाता है। यह तीर्थ स्थल चार धामों में से एक है। यह उत्तराखंड राज्य में स्थित है। इसके पश्चिम की ओर मन्दाकिनी नदी बहती है। उत्तराखंड के चार धाम गंगोत्री, यमनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ हैं। जिसमें केदारनाथ का बड़ा महत्त्व है। यह पावन तीर्थ स्थल मनमोहक पहाड़ियों से घिरा हुआ है। केदारानाथ जाने वाले तीर्थयात्री पवित्र जल लेने के लिए सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्रि जाते हैं , जिसे वे केदारनाथ शिवलिंग को अर्पित करते हैं। बेहद ठंडे मौसम और बर्फबारी के कारण यह मंदिर साल में केवल 6 महीने मई से जून तक खुलता है। माना जाता है कि केदारनाथ के दर्शन करने के बाद व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है।

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग वाराणसी उत्तर प्रदेश

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

उत्तरप्रदेश के वाराणासी में स्वर्ण मंदिर के रूप में प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ भारत में 12 ज्योतिर्लिगों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। सन् 1780 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित यह ज्योतिर्लिंग हिन्दुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। भक्तों का मानना है कि भगवान शिव ने यहां निवास कर सभी को खुशी और मुक्ति प्रदान की थी। इस जगह के बारे में माना जाता है कि प्रलय आने पर भी विश्वनाथ मंदिर डूबेगा नहीं बल्कि ऐसे ही बना रहेगा। इसकी रक्षा करने के लिए खुद भगवान शिव इस जगह को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय टल जाने पर काशी को उसकी फिर से जगह दे देंगे।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

मध्यप्रदेश में इंदौर के पास स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से मध्यप्रदेश में 2 ज्योतिर्लिंग स्थित है. यहां नर्मदा नदी बहती है और नदी के बहने से पहाड़ी के चारों ओर ओम का आकार बनता है। यह ज्योर्तिलिंग असल में ओम का आकार लिए हुए है, यही वजह है कि इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है। ओंकारेश्वर मंदिर का एक पौराणिक महत्व भी है। लोगों का मानना है कि एक बार देवता और दानवों के बीच युद्ध हुआ और देवताओं ने भगवान शिव से जीत की प्रार्थना की। प्रार्थना से संतुष्ट होकर भगवान शिव यहां ओंकारेश्वर के रूप में प्रकट हुए और देवताओं को बुराई पर जीत दिलाकर उनकी मदद की।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन मध्य प्रदेश

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का विशाल आध्यात्मिक महत्व है। यह ज्योतिर्लिंग मध्य भारत के लोकप्रिय बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है। इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण पांच साल के लड़के श्रीकर ने कराया था। कहा जाता है कि श्रीकर उज्जैन के राजा चंद्रसेन की भक्ति से काफी प्रेरित था । क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के सात मुक्ति स्थलों के बीच बसा हुआ है।

12 Jyotirling श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु

श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

देश में दक्षिणी ज्योतिर्लिंग रूप में पूजा जाता है रामेश्वरम का ज्योतिर्लिंग। यह ज्येातिर्लिंग तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है। माना जाता है कि भगवान राम ने रावण के वध के बाद इस ज्योतिर्लिंग की पूजा की थी। यह मंदिर समुद्र से घिरा हुआ है। दक्षिण के वाराणसी के रूप में लोकप्रिय रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग भारत में सबसे ज्यादा पूजा जाने वाला बारह ज्योतिर्लिंग मै से एक है। इस ज्योतिर्लिंग पर जाने वाले भक्त धनुषकोडि समुद्र तट पर भी जाते हैं, जहां से भगवान राम ने अपनी पत्नी को बचाने के लिए रामसेतु का निर्माण किया था। यह ज्योतिर्लिंग भी भारत के चार धामों में से एक है।

12 Jyotirling मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्रप्रदेश

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

आंध्रप्रदेश में स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को साउथ का कैलाश भी कहा जाता है। यह ज्योतिर्लिंग कृष्णा नदी के तट पर श्री शैल पर्वत पर स्थित है। सुंदर वास्तकुला गोपुरम के नाम से जानी जाती है। मल्लिकार्जुन के मंदिर को शिव और पार्वती के देवताओं के रूप में जाना जाता है। यह 12 ज्योतिर्लिंग की गिनती मै तो आता ही है और ये सती के 52 भक्ति पीठों में से एक भी है। मल्लिकार्जुन निर्विवाद रूप से देश के महान शैव तीर्थों में से एक है।

12 Jyotirling घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

घृष्णेश्वर या घुश्मेश्वर एक प्रसिद्द शिव मंदिर है तथा हिन्दू पुराणों के अनुसार शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. रुद्रकोटीसंहिता, शिव महापुराण स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रं के अनुसार यह ज्योतिर्लिंग बारहवें तथा अंतिम क्रम पर आता है. यह मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के समीप दौलताबाद से 11 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है. यह स्थान विश्वप्रसिद्ध एलोरा गुफाओं से एकदम लगा हुआ तथा वेलुर नामक गाँव में स्थित है.प्राचीन हिन्दू धर्मग्रंथों में इसे कुम्कुमेश्वर के नाम से भी संदर्भित किया गया है. इस मंदिर को इसके चित्ताकर्षक शिल्प के लिए भी जाना जाता है. यदि क्रम की बात करें तो हिन्दुओं के लिए घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा का मतलब होता है बारह ज्योतिर्लिंग यात्रा का समापन. घृष्णेश्वर दर्शन के बाद द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा को पूर्णता प्रदान करने के लिए श्रद्धालु काठमांडू, (नेपाल) स्थित पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए जाते हैं।

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Final Words:- आशा करता हू कि ये सभी कहांनिया 12 Jyotirling Story आपको जरूर पसंद आई होगी । और ये सभी कहानियां और को बहुत ही प्रेरित भी की होगा । अगर आप ऐसे ही प्रेरित और रोचक Kahani प्रतिदिन पाना चाहते हैं तो आप हमारे इस वेबसाइट को जरूर सब्सक्राइब करले जिससे कि आप रोजाना नई काहानियों को पढ़ सके धन्यवाद।

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