Category: Story In Hindi

मुर्गाभाई और कौवेराम की कथा

संसार के सबसे बड़े 3 देवताओं में से एक ब्रह्माजी धरती पर भ्रमण करने निकले थे। सभी जीवचर उनके दर्शनों के अभिलाषी थे। इस कारण जैसे ही उनके आने की सूचना मिली, संसार के सभी प्राणी उनके जोरदार स्वागत की तैयारी में लग गए। कोई सुंदर सुगंधित मालाएं गूथने लगा तो कोई मीठे-मीठे फल-कंद और

एक चमत्कार

आज रोहन तीन दिन बाद विद्यालय आया था। आज फिर उसके गले में सुनहरे मो‍तियों वाली एक नई माला थी। माला के नि‍चले हिस्से में तांबे की पट्टी-सी लटक रही थी जिस पर आड़ी-तिरछी कई लकीरें खिंची हुई थीं। पिछले सप्ताह वह काले मोतियों वाली माला पहनकर आया था। विद्यालय से छुट्टी मिलते ही उसके

विकलांग

कक्षा में एक नया प्रवेश हुआ… पूर्णसिंह। उसकी विकृत चाल देखकर बच्चे हंसने लगे। किसी ने कहा लंगड़ूद्दीन, किसी ने तेमूरलंग तो किसी ने कह दिया- वाह नाम है पूर्णसिंह और है बेचारा अपूर्ण। मतलब यह कि अध्यापक के आने से पहले तक उपस्थित विद्यार्थियों ने उसको परेशान करने में किसी प्रकार की कमी नहीं

पतंगबाजी का प्रयोजन

बहुत समय पहले की बात है। महाराष्ट्र में किसी जगह एक गुरु का आश्रम था। दूर-दूर से विद्यार्थी उनके पास अध्ययन करने के लिए आते थे। इसके पीछे कारण यह था कि गुरुजी नियमित शिक्षा के साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी बहुत जोर देते थे। उनके पढ़ाने का तरीका भी अनोखा था। वे हर बात

मदद

आज मीना स्कूल थोड़ी देर से पहुँची।बहिन जी द्वारा देर से आने का कारण पूँछने पर मीना ने बताया की उसने स्कूल के रास्ते में पड़ने वाले हैण्डपम्प पर दीनू काका की पानी से भरी बाल्टी उठाने में मदद की।शोभा ने जब मदद के बदले इनाम की बात पूँछी तो मीना ने जवाब दिया ,’मैंने

दावत का लड्डू

सारे गाँव में हल्ला हो रहा है।……गाँव में दावत जो चल रही है। सारे गाँव वाले खुश है, नई-नई तरह की मिठाइयाँ खाने को मिल रही है। गाँव में रमेश और रघु ज्यादा खाने वाले हैं…जिनके बीच आज मुकाबला भी होना है। उनमे आपस में बहस चल रही है कि कौन खाने में जीतेगा? रवि

पेड़ों को बचाओ

मीना, उसके दोस्त बगीचे में खेलने जाते हैं। वहां पर उन्हे पेड़ की कुछ टहनियां टूटी हुयी मिलती हैं। मीना कहती है कि इस तरह तो पेड़ों की टहनियां कम होती जायेंगी,…..तो चिड़ियाँ अपना घोंसला कहाँ पर बनायेंगी? उनमे से एक बच्चा कहता है कि रमेश चाचा लकड़ियाँ काट कर ले गयें हैं…..मीना कहती है

मोनू की खरीददारी

मोनू के पिताजी,आज शहर से वापस आ रहे हैं। मोनू बहुत खुश है। मोनू, मीना को भी अपने घर ले जाता है। मोनू के पिताजी का पैर फिसलने के कारण उनके हाथ की हड्डी टूट गयी थी तो डॉक्टर को उनके हाथ पर प्लास्टर लगाना पड़ा। सब चिंतित होते हैं। मोनू की माँ, घर का

लड़का लड़की एक समान

मीना और रोशनी स्कूल जा रही हैं। मीना – रोशनी जल्दी चलो, आज बहिन जी विज्ञान का पाठ सुनेगी। और स्कूल पहुँचकर पता चलता है कि बहिनजी को कुछ दिनों के लिए शहर जाना पड़ गया। तब तक कक्षा में रजनी बहिनजी पढ़ायेंगी। लड़कियां उदास हो जाती है क्योंकि रजनी बहिन जी तो लड़कियों को

बुरे काम को ‘ना’ कहो

मीना तारा के साथ स्कूल से लौट रही है। अगले हफ्ते होने वाले संगीत के मुकाबले में तारा और बेला साथ में भाग लेंगी। लेकिन बेला तो स्कूल ही नहीं आ रही है…तारा अभ्यास किसके साथ करे।…..कारण पता लगाने मीना और तारा,बेला के घर पहुँचाने ही वाले थे की रास्ते में पोंगाराम चाचा मिल जाते
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