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Govardhan Puja Story | Govardhan Puja ki Katha | गोवर्धन पूजा

Govardhan Puja Story (गोवर्धन पूजा व्रत कथा)
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Govardhan Puja Story (गोवर्धन पूजा व्रत कथा)

Govardhan Puja Story:-एक बार की बात है इंद्र को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया। तब भगवान कृष्ण ने उनके घमंड को चूर करने के लिए एक लीला रची। इसमें उन्होंने सभी ब्रजवासियों और अपनी माता को एक पूजा की तैयारी करते हुए देखा तो, यशोदा मां से पूछने लगे, “मईया आप सब किसकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं?” तब माता ने उन्हें बताया कि ‘वह इन्द्रदेव की पूजा की तैयारी कर रही हैं।”

फिर भगवान कृष्ण ने पूछा “मैइया हम सब इंद्र की पूजा क्यों करते है? तब मईया ने बताया कि ‘इंद्र वर्षा करते हैं और उसी से हमें अन्न और हमारी गाय को घास मिलती है। यह सुनकर कृष्ण जी ने तुरंत कहा “मैइया हमारी गाय तो अन्न गोवर्धन पर्वत पर चरती है, तो हमारे लिए वही पूजनीय होना चाहिए। इंद्र देव तो घमंडी हैं वह कभी दर्शन नहीं देते हैं।

कृष्ण की बात मानते हुए सभी ब्रजवासियों ने इन्द्रदेव के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इस पर क्रोधित होकर भगवान इंद्र ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। वर्षा को बाढ़ का रूप लेते देख सभी ब्रज के निवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगें। तब कृष्ण जी ने वर्षा से लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया।

इसके बाद सब को अपने गाय सहित पर्वत के नीचे शरण लेने को कहा। इससे इंद्र देव और अधिक क्रोधित हो गए तथा वर्षा की गति और तेज कर दी। इन्द्र का अभिमान चूर करने के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियंत्रित करने को और शेषनाग से मेंड़ बनाकर पर्वत की ओर पानी आने से रोकने को कहा।

इंद्र देव लगातार रात- दिन मूसलाधार वर्षा करते रहे। काफी समय बीत जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि कृष्ण कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। तब वह ब्रह्मा जी के पास गए तब उन्हें ज्ञात हुआ की श्रीकृष्ण कोई और नहीं स्वयं श्री हरि विष्णु के अवतार हैं। इतना सुनते ही वह श्री कृष्ण के पास जाकर उनसे क्षमा याचना करने लगें। इसके बाद देवराज इन्द्र ने कृष्ण की पूजा की और उन्हें भोग लगाया। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा कायम है। मान्यता है कि इस दिन गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं।

आरती श्री गोवर्धन महाराज

श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

॥ श्री गोवर्धन महाराज…॥

तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,

तोपे चढ़े दूध की धार।

॥ श्री गोवर्धन महाराज…॥

तेरे गले में कंठा साज रेहेओ,

ठोड़ी पे हीरा लाल।

॥ श्री गोवर्धन महाराज…॥

तेरे कानन कुंडल चमक रहेओ,

तेरी झांकी बनी विशाल।

॥ श्री गोवर्धन महाराज…॥

तेरी सात कोस की परिकम्मा,

चकलेश्वर है विश्राम।

श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गिरिराज धारण प्रभु तेरी शरण।

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Final Words:- आशा करता हू कि ये सभी कहांनिया Govardhan Puja Story आपको जरूर पसंद आई होगी । और ये सभी कहानियां और को बहुत ही प्रेरित भी की होगा । अगर आप ऐसे ही प्रेरित और रोचक Kahani प्रतिदिन पाना चाहते हैं तो आप हमारे इस वेबसाइट को जरूर सब्सक्राइब करले जिससे कि आप रोजाना नई काहानियों को पढ़ सके धन्यवाद।

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